कोलकाता । पश्चिम बंगाल में TMC की राजनीति में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में एक बहुत बड़ी टूट की संभावना नजर आ रही है। पार्टी से निष्कासित किए गए विधायकों ने दावा किया है कि TMC के 80 में से 50 से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं और वे खुद को ‘असली तृणमूल’ घोषित करने की तैयारी में हैं।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब सोमवार शाम को कोलकाता के MLA हॉस्टल में तृणमूल के कई विधायकों की एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें ममता बनर्जी के कुछ वफादार चेहरों के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है।
बागी गुट का दावा : स्पीकर के सामने उठाएंगे 3 बड़े मुद्दे
पार्टी से निकाले गए विधायक रिजू दत्ता ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उनके मुताबिक, बागी विधायक आज ही विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात करेंगे और उनके सामने निम्नलिखित तीन मुख्य मांगें रखेंगे-
* बागी गुट का कहना है कि 80 में से 50 से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं, जो कि दल-बदल कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई आंकड़े से अधिक है। इसलिए वही असली TMC हैं।
* बागी गुट शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) बनाना चाहता है।
* बहुमत का हवाला देते हुए इस गुट ने पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर भी अपना दावा ठोकने की बात कही है।
विवाद की जड़ (फर्जी हस्ताक्षर का आरोप)
निलंबित विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी का आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष को नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसमें उनके फर्जी साइन (हस्ताक्षर) किए गए थे। जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो उन्हें उल्टा पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
इस राजनीतिक संकट पर किसने क्या कहा?
TMC के भीतर मचे इस घमासान पर विपक्षी दलों और खुद TMC की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं-
- उदित राज (कांग्रेस) | ममता बनर्जी ने जो बोया है, वही काट रही हैं। TMC के कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है और मुझे नहीं लगता कि अब यह पार्टी आगे जिंदा रह पाएगी। ममता को अब ‘INDIA’ ब्लॉक को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
समिक भट्टाचार्य (BJP अध्यक्ष, WB) | TMC के लोगों के लिए हमारे दरवाजे पूरी तरह बंद हैं। हमने बिना किसी बाहरी की मदद के खुद 207 का आंकड़ा छुआ है। हम दागी लोगों को शामिल करके बीजेपी का ‘तृणमूलीकरण’ कभी नहीं होने देंगे। |
शोभनदेव चट्टोपाध्याय (TMC) |दलबदल की तमाम अटकलों के बावजूद पार्टी के अधिकांश विधायक ममता बनर्जी के साथ ही मजबूती से खड़े रहेंगे। पुराने और वफादार नेता संगठन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेंगे।
आगे क्या होगा?
यदि बागी गुट स्पीकर के सामने 50 विधायकों के समर्थन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराने में सफल रहता है, तो पश्चिम बंगाल विधानसभा में न सिर्फ विपक्ष का चेहरा बदल जाएगा, बल्कि ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य और संगठन पर उनकी पकड़ के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा। राजनीतिक पंडितों की नजरें अब विधानसभा स्पीकर के रुख पर टिकी हैं।






