दुबई एयरशो में शुक्रवार को भारतीय समय में दोपहर 3.40 बजे भारतीय वायुसेना का तेजस फाइटर जेट हवा में कलाबाजियां कर रहा था, तभी वह जमीन से टकरा गया। क्रैश के बाद पहले आग का गोला और फिर धुएं का बड़ा गुबार दिखा। इस घटना में पायलट भी खुद को नहीं बचा सका।
एविएशन एक्सपर्ट अनंत सेठी कहते हैं कि एयरशो के दौरान इस तरह के हादसे होना बड़ी बात नहीं है। ऐसे शो के दौरान पायलट को विमान की सारी क्षमताएं दिखानी होती हैं। क्रैश के जो शुरुआती विजुअल दिख रहे हैं, उसमें विमान अचानक नोज डाउन होकर फ्री फॉल होते दिख रहा है।
एयरशो के दौरान प्लेन क्रैश की सबसे आम वजह यही है। एयर शो में पायलट को तेजी से कई करतब करने होते हैं, जैसे विमान को एक लूप में उड़ाना, रोलिंग करना या लो-लेवल फ्लाई करना। अगर मैन्यूवर यानी रास्ता बदलने के तरीके में जरा भी चूक हो जाए या हवा के बहाव और मिनिमम सेफ ऊंचाई को कम आंका जाए, तो एयरक्राफ्ट का कंट्रोल खो सकता है।
एयर शो में तेजस जैसे हल्के फाइटर आमतौर पर बहुत तेज मोड़ लेते हैं। अगर एंगल ऑफ अटैक बहुत बढ़ गया हो या गति अचानक कम हो गई हो, तो कंट्रोल लॉस हो सकता है। यह एयर शो क्रैशों की आम वजह भी है। तेजस के जो विजुअल आ रहे हैं, उनमें विमान ने पहले ऊंचाई खो दी, फिर रोल करते हुए स्थिरता पाने की कोशिश की, लेकिन कंट्रोल नहीं हो सका। बीते साल भी जब तेजस क्रैश हुआ था, तो पायलट की ट्रेनिंग एरर की बात कही गई थी।






