भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी कानूनी खबर देश की सर्वोच्च अदालत से आ रही है। कांग्रेस नेता नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट कल शुक्रवार सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। इस संवेदनशील मामले में एक तरफ जहां कांग्रेस ने कोर्ट से अंतिम फैसला आने तक चुनाव परिणाम रोकने की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि उन्हें अभी तक इस याचिका की कोई कॉपी नहीं मिली है।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल सहित पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त यह मामला गरमाया हुआ है। दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी नटराजन का नामांकन तकनीकी या अन्य आधारों पर चुनाव अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया था। कांग्रेस ने इस फैसले को एकतरफा और नियम विरुद्ध बताते हुए इसके खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कांग्रेस ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कल ही इस पर सुनवाई की तारीख तय की है।
पक्ष-विपक्ष की दलीलें और मांगें
इस पूरे विवाद में मुख्य रूप से तीन पक्ष आमने-सामने हैं, जिसमें कांग्रेस पार्टी का कहना है कि नटराजन का नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि जब तक इस याचिका पर अदालत का कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक संबंधित सीट के चुनाव परिणामों की घोषणा (रिजल्ट) पर रोक लगाई जाए।
चुनाव आयोग ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें इस याचिका के संबंध में जानकारी तो मिली है, लेकिन अभी तक याचिका की कोई आधिकारिक कॉपी (प्रतिलिपि) उन्हें रिसीव नहीं हुई है। आयोग कॉपी मिलने के बाद अपना कानूनी पक्ष रखेगा।
इस सुनवाई पर न सिर्फ भोपाल बल्कि दिल्ली के राजनीतिक रणनीतिकारों की नजरें भी टिकी हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस सीट के पूरे चुनावी समीकरण को बदल सकता है।
कल की सुनवाई पर टिकीं नजरें
कल सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है। अदालत के रुख से यह साफ हो जाएगा कि क्या चुनाव प्रक्रिया अपने तय शेड्यूल के मुताबिक चलेगी या फिर कोर्ट कांग्रेस की मांग को स्वीकार करते हुए नतीजों पर किसी तरह का अंतरिम स्टे (रोक) लगाएगा। इस फैसले का असर मध्य प्रदेश की आगे की राजनीति पर पड़ना तय है।




