छत्तीसगढ़

नकली मंगलसूत्र बांटे जाने के बयान पर बोला महिला एवं बाल विकास : नियमों के तहत चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं

मनेन्द्रगढ़। खड़गवां ब्लॉक के चनवारीडांड में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सामूहिक विवाह में चांदी की जगह गिलेट का मंगलसूत्र बांटे जाने के विवाद पर अब महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। विभाग ने साफ किया है कि नियमों के तहत चांदी का मंगलसूत्र देना अनिवार्य नहीं है। इस आयोजन में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता नहीं हुई है।

चांदी महंगी होने के कारण बांटे गए कृत्रिम मंगलसूत्र

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाजार में चांदी की बढ़ती कीमतों और योजना के लिए निर्धारित वित्तीय सीमा को ध्यान में रखते हुए ही हितग्राहियों को आर्टिफिशियल मंगलसूत्र देने का निर्णय लिया गया था। नियमों के मुताबिक मंगलसूत्र का चांदी का होना अनिवार्य नहीं है।

गुणवत्ता में कमी मिलने पर फर्म के भुगतान में कटौती, वधुओं को मिले पैसे

योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। विवाह के बाद जब बांटे गए कृत्रिम मंगलसूत्रों की गुणवत्ता में कमी पाई गई,  तो विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित वेंडर के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र 1,000 रुपए की कटौती कर ली। फर्म से काटी गई यह राशि विभाग द्वारा सीधे संबंधित वधुओं (हितग्राहियों) के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित (ट्रांसफर) कर दी गई है।

नियमों के तहत संपन्न हुआ कार्यक्रम

महिला एवं बाल विकास विभाग का आधिकारिक बयान में कहा गया है – 10 फरवरी 2026 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम पूरी तरह से शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों और भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए संपन्न कराया गया है। इसमें किसी भी तरह का कोई भ्रष्टाचार या गड़बड़ी नहीं हुई है।

हितग्राहियों को मिली 36,000 की प्रत्यक्ष सहायता

विभाग ने बजट का पूरा ब्यौरा देते हुए बताया कि इस व्यवस्था के बाद  प्रत्येक पात्र कन्या को 36,000 रुपए की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता बैंक खाते और अन्य स्वीकृत मदों के जरिए प्राप्त हुई है। योजना की शेष राशि को नियमों के मुताबिक विवाह के भव्य आयोजन,  भोजन और अन्य आवश्यक विवाह सामग्री की व्यवस्था पर खर्च किया गया है।

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