बलौदाबाजा| ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत शनिवार को विकासखंड सिमगा के कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा स्थित सदगुरुदेव कबीर आश्रम में लगभग 300 वर्ष पुरानी हस्तलिखित प्राचीन पांडुलिपियां प्राप्त हुईं, जिनका डिजिटल संरक्षण “ज्ञानभारतम” एप के माध्यम से किया गया। इस अवसर पर डॉ. भानुप्रताप साहेब का शाल व श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान एसडीएम अतुल शेट्टे, कबीर आश्रम समिति के अध्यक्ष प्रकाश पटेल एवं सरपंच श्री कमलेश साहू उपस्थित थे।
जानकारी के अनुसार सदगुरुदेव कबीर आश्रम में 300 वर्ष से अधिक पुरानी एवं वर्ष 1910 के मध्य कबीर साहित्य एवं विभिन्न वंशाचार्यों के निर्देश पर हस्तलिखित 28 ग्रन्थ को सहेज कर रखा गया था। इन दुर्लभ ग्रंथों की कुल पृष्ठ संख्या लगभग 2521 है।
इन ग्रंथों में कबीर ग्रंथावली, पंथ श्री हुजूर नाम साहब 8 वें गुरू, जन्म वंशावली धर्मदास, शब्द होरी, ब्रम्ह समाधि, ज्ञान सकरी, अंकुर विस्तार, ब्रम्ह निरूपण, ग्रन्थ चूडामणि प्रकाश, मूल ज्ञान की सीढ़ी, अनुराग सागर, ग्रंथ विवेक सागर, अगम संदेश, रामानंद की गोष्ठी, सुल्तान बोध, काया पांजी, मूल पांजी, लोक संदेश, भेद शास्त्र, सुमरन सार भेद, जुग समाधी, सुका वाटक, निर्भय ज्ञान, पंचायन बोध पार्ट-1 से 5 तक शामिल हैं।
ज्ञातव्य है कि भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के निर्देशनुसार ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिले में किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य पांडुलिपियों की उपस्थिति का मानचित्रण करना और उनके व्यवस्थित संरक्षण, अनुसंधान और डिजिटलीकरण के लिए आधार तैयार करना है।
कलेक्टर ने कहा इस राष्ट्रीय सर्वे में सहयोग करें और कोई भी हस्तलिखित प्राचीन ग्रन्थ हो तो सर्वे टीम को जानकारी दें। इस कार्य में ग्रन्थ का केवल फोटो लेकर अपलोड किया जाएगा, मूल प्रति आपके पास ही रहेगा।






