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भाटापारा की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी को है अब गहरीकरण की दरकार : करोड़ों के एनीकट के साथ संरक्षण की उठने लगी मांग

भाटापारा। क्षेत्र में भू-जल स्तर को बनाए रखने और पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा करोड़ों की लागत से एनीकटों का निर्माण किया जाता है। भाटापारा शहर के लिए शिवनाथ नदी किसी वरदान से कम नहीं है, जो दशकों से शहर की प्यास बुझा रही है। लेकिन अब समय की मांग को देखते हुए नदी के गहरीकरण और इसके प्राकृतिक स्वरूप के संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

1957 से जारी है टोहडीघाट से जलापूर्ति

भाटापारा शहर की पेयजल व्यवस्था का मुख्य आधार शिवनाथ नदी है। सन 1957 से ही टोहडीघाट के माध्यम से शहर में पानी की आपूर्ति की जा रही है। बढ़ती आबादी के साथ जल आपूर्ति की प्रणालियों को अपग्रेड तो किया गया, लेकिन जल का मुख्य स्रोत आज भी शिवनाथ ही है। सेमरियाघाट पर बना एनीकट, जो बलौदाबाजार- भाटापारा और बेमेतरा जिले के नांदघाट तक लगभग 8 किमी के दायरे में फैला है, पूरे क्षेत्र के लिए जल का एक बड़ा भंडार है।

भीषण गर्मी में भी बना रहता है जलस्तर

विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, टोहडीघाट के पास नदी का सबसे गहरा हिस्सा है। यहां मई-जून की भीषण गर्मी में भी 15 से 20 फीट तक पानी उपलब्ध रहता है। वहीं, भाटापारा से 12 किमी दूर स्थित प्रसिद्ध दार्शनिक स्थल मदकू द्वीप के पास, जहां हाफ नदी का शिवनाथ में संगम होता है, वहां गहराई 40 से 50 फीट तक रहती है।

गहरीकरण से रिचार्ज होंगे सैकड़ों बोर पंप

वर्तमान में चर्चा इस बात पर जोर दे रही है कि यदि एनीकटों के साथ-साथ शिवनाथ नदी का वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण किया जाए, तो स्थिति और बेहतर हो सकती है। नदी के तल से अनावश्यक पत्थर और कचरा निकालने से जल धारण क्षमता बढ़ेगी। गहरीकरण होने से आसपास के गांवों के सैकड़ों बोर पंप गर्मी के दिनों में भी रिचार्ज रहेंगे। वर्तमान में मारो, घुरसेना और संबलपुर के लिए चल रही लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को इससे सीधा लाभ मिलेगा।

बाढ़ से कटाव और संरक्षण की चुनौती

इस वर्ष बारिश के मौसम में शिवनाथ नदी में चार बार बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई। बाढ़ के कारण किनारों की मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जिससे नदी का पाट चौड़ा होता जा रहा है। सेमरियाघाट पर नदी की चौड़ाई 300 मीटर है, जो आगे रामपुर घाट तक और बढ़ जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस तरह अन्य विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत की जाती है, उसी तरह शिवनाथ के तटबंधों की सुरक्षा और गहरीकरण के लिए भी विशेष मद से राशि जारी होनी चाहिए।

औद्योगिक और धार्मिक महत्व

शिवनाथ नदी न केवल पेयजल और कृषि का आधार है, बल्कि निपनिया स्थित कई पावर प्लांट भी इसी के जल पर निर्भर हैं। शिवरीनारायण में महानदी से मिलने वाली यह नदी बलौदाबाजार, बेमेतरा और मुंगेली जिलों की सीमा को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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