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कठवा फाल बना मिनी भेड़ाघाट : 15 फीट ऊंचाई से गिर रहा पानी आम लोगों को लुभा रहा

भैंसा| छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच जहां एक ओर जल संकट गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गंगरेल बांध से छोड़ा गया पानी गांवों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा।

महानदी मुख्य नहर के माध्यम से बहता यह जल सूखे तालाबों को भरने के साथ ही ग्रामीणों को गर्मी के बीच मानसून जैसी राहत का एहसास भी करा रहा है। नहरों में लबालब बहता पानी इन दिनों ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा है, मानो बरसात का मौसम समय से पहले ही आ गया हो।
इधर खेत खलिहानों और गांवों के बीच बहती जलधारा नदी-नालों के उफान की याद ताजा कर रही है। इसी बीच कुकरा गांव के समीप एक अनोखा प्राकृतिक नजारा लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले स्थित कठवा फाल में जब नहर का पानी करीब 15 फीट की ऊंचाई से वेग के साथ नीचे गिरता है, तो वहां बनता दृश्य देखते ही बनता है।

भेड़ाघाट की दिला रहा याद

यह दृश्य बिल्कुल भेड़ाघाट के प्रसिद्ध दूधिया घाट की याद दिलाता है। गिरते पानी की तेज धार चट्टानों से टकराकर सफेद, झागदार और गेजगेजा रूप ले लेती है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो दूध की धारा बह रही हो। चिलचिलाती धूप के बीच इस सफेद चादर जैसे जलप्रपात को देखकर राहगीर और ग्रामीण मंत्रमुग्ध हो उठते हैं।

कठवा फाल का आनंद ले रहे अंचलवासी

कठवा फाल का यह “मिनी भेड़ाघाट” इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग पहुंचकर इस अद्भुत सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं। महानदी मुख्य नहर में बह रहा यह पानी केवल तालाबों की प्यास ही नहीं बुझा रहा, बल्कि आसपास के कुओं और बोरवेल का जलस्तर भी बढ़ा रहा है। इससे पशुधन को भी पर्याप्त पानी मिल रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

पर्यटन स्थल जैसा लग रहा क्षेत्र

गर्मी के इस कठिन दौर में जहां पानी की हर बूंद कीमती होती है, वहीं कुकरा के पास बहता यह दूधिया प्रपात न सिर्फ निस्तारी की समस्या का समाधान कर रहा है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन जैसी संभावनाओं को भी जन्म दे रहा है।

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