वॉशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब मध्य पूर्व (Middle East) की सीमाओं को लांघकर एशिया तक पहुँच गया है। अमेरिकी नौसेना ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बंगाल की खाड़ी में ईरान के तेल से लदे एक विशाल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत की संभावनाएं लगभग खत्म नजर आ रही हैं।
बंगाल की खाड़ी में ‘टिफ़नी’ पर कब्जा
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बोत्सवाना का झंडा लगे टैंकर ‘टिफ़नी’ को घेराबंदी कर पकड़ा गया। यह टैंकर करीब 20 लाख बैरल तेल ले जाने में सक्षम था। खास बात यह है कि यह कार्रवाई श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच के समुद्री क्षेत्र में हुई, जो दक्षिण एशिया में अमेरिका के बढ़ते दखल को साफ दर्शाता है।
ट्रंप का ‘डार्क फ्लीट’ पर प्रहार
यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े निर्देश का हिस्सा है, जिसके तहत ईरान के ‘डार्क फ्लीट’ को निशाना बनाया जा रहा है। ये वे जहाज हैं जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देकर अवैध रूप से तेल निर्यात करने में ईरान की मदद करते हैं। अमेरिका ने अब तेहरान से जुड़े जहाजों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए एक ‘ग्लोबल वॉर्निंग सिस्टम’ भी लागू कर दिया है।
समुद्री नाकेबंदी : 28 जहाजों को दिखाया गया रास्ता
अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने मिलकर ईरान के बंदरगाहों की प्रभावी नाकेबंदी की हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: 13 अप्रैल से शुरू हुई इस नाकेबंदी के बाद अब तक 28 जहाजों को या तो वापस लौटने पर मजबूर किया गया है या उनका रास्ता बदलवा दिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है, कि वे किसी भी देश या कंपनी को ईरान के साथ समुद्री रास्ते से व्यापार नहीं करने देंगे।
ईरान की प्रतिक्रिया : ‘यह युद्ध की शुरुआत है’
इस कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कदम को ‘युद्ध का कृत्य’ (Act of War) करार दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना वैश्विक नियमों का खुला उल्लंघन है।






