कोलकाता। ममता बनर्जी सी सीरत और सयानी सी सूरत वाली 33 साल की घोष आज ममता बनर्जी से उम्र में करीब-करीब आधी हैं। सयानी भी ममता की तरह सफेद साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल पहने नजर आती हैं। ममता ने कभी आम लोगों के बीच एक साधारण सी महिला की मजबूत छवि गढ़ी।
ममता ने 1998 में राजनीतिक मतभेदों के चलते कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई। उन्होंने 2009 में मुख्य राजनीतिक नारा दिया-‘मां, माटी, मानुष’ (मां, मातृभूमि और लोग)। यह नारा 2009 के आम चुनाव और 2011 के विधानसभा चुनाव के दौरान बेहद पॉपुलर हुआ, जिसने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी की नींव रखी।
अपनी इसी इमेज की बदौलत ममता ने बंगाल से वामपंथियों का सत्ता से सफाया कर दिया। 2011 से लेकर आज तक वह पश्चिम बंगाल की राजरानी बनी हुई हैं। मगर, जीवन के उत्तरार्ध में ऐसा लगता है कि ममता को अपने जैसा ही एक दमदार चेहरा मिल गया है। सयानी कुछ-कुछ इसी तर्ज पर खरी उतरती दिखाई देती हैं।
एक्टिंग और सिंगिंग से पॉपुलर बनीं, फिर राजनीति में चमकीं
सयानी 2021 से पहले केवल बंगाली एक्ट्रेस थीं। कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली सयानी राजनीति में आने से पहले ही पश्चिम बंगाल में बांग्ला भाषी फिल्मों में अपनी एक्टिंग और सिंगिंग से पॉपुलर हो चुकी थीं। मगर, 2021 में सयानी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गईं। आज वह टीएमसी की स्टार प्रचारक हैं और राजनीतिक रील्स में भी उनके बयान खूब देखे-सुने जाते हैं।
विवादों से सयानी की राजनीति में शुरुआत
सयानी की राजनीति में शुरुआत उनकी एक विवाद से हुई, जब 2021 में ही सयानी घोष को त्रिपुरा में गिरफ्तार भी किया गया था। दरअसल, त्रिपुरा में स्थानीय चुनावों के समय सयानी ने बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते हुए नारा लगाया था-‘खेला होबे।’ यह नारा 2021 में बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी ने दिया था। 2023 में टीएमसी की यूथ विंग की अध्यक्ष रहीं सयानी से पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने 10 घंटों तक पूछताछ की थी।
2024 में टीएमसी के टिकट पर जादवपुर से लोकसभा चुनाव जीत हासिल की
1993 में कोलकाता में पैदा हुईं सयानी घोष ने 2021 आसनसोल से विधानसभा चुनाव लड़ा, मगर वो हार गईं। इसके बाद सयानी घोष ने 2024 में टीएमसी के टिकट पर जादवपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। आज सयानी बंगाल में महिलाओं के सम्मान और मजबूती का प्रतीक बन चुकी हैं।
सयानी घोष टीएमसी के कुल 29 सांसदों में से 11 महिलाओं में शामिल हैं। महुआ मोइत्रा जैसी चर्चित लीडर होने के बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग छवि गढ़ी है, जो किसी को भी सहज ही उनकी ओर खींच लाती है।
उनका अंदाज तेज, आक्रामक और बेबाक
बंगाल में महिला नेता खुलकर, बेझिझक और पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रचार करती हैं। उनका अंदाज तेज, आक्रामक और बेबाक होता है, जिसे दूसरे राज्यों में अक्सर ‘मर्दाना’ कहकर आलोचना की जाती है। लेकिन बंगाल में इसे सहज रूप से स्वीकार किया जाता है, बल्कि सराहा जाता है। जो चीज़ बाहर से देखने पर ‘सशक्तिकरण’ लगती है, वह यहां की सामान्य संस्कृति का हिस्सा है।
संसद में सयानी हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला में बोलती हैं
संसद में सयानी घोष हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला सभी में बोलती हैं। उनके भाषणों में चुटीलापन से लेकर कोई नज्म या गीतों के अंश भी शामिल होते हैं, जो अक्सर वायरल हो जाते हैं। हाल ही में संसद में उन्होंने कहा-जिस तरह से ये संसद प्रधानमंत्री के लिए एक मंदिर है, उसी तरह ये हमारे लिए भी एक मंदिर है और भारत का गणतंत्र हमारी पूजा है। संविधान हमारी भगवद्गीता है।
अप्रैल में बजट पर चर्चा के दौरान अपने संसदीय भाषण में सयानी घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ इशारा करते हुए कहा था-हम लड़ते हैं आपसे, संविधान हाथ में लेकर लड़ते हैं, हाथ में हमारे तलवार नहीं है सर। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा-तू लाख बेवफा है, मगर सर उठा के चल, दिल रो पड़ेगा तुझे पशेमान देखकर।
हनुमान चालीसा पढ़ती हैं सयानी
सोशल मीडिया पर उनकी रील्स में बॉलीवुड से लेकर बंगाली हिट्स की धूम मची रहती है। चुनावी माहौल के बीच वायरल एक वीडियो में वह चंडी पाठ करती नजर आती हैं, फिर अजान और उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करती दिखाई देती हैं। वो धार्मिक गीत गाकर भी लोगों से जुड़ रही हैं। हाल ही में एक चुनावी मंच से उन्होंने बंगाली नज्म गाई, जिसका हिंदी अनुवाद है-मेरे दिल में काबा है, आंखों में मदीना है।
मैं अपनी नेता को फॉलो करती हूं। क्या ये अच्छी बात नहीं है? मेरी नेता बहुत सरल इंसान हैं। आम लोगों की तरह हैं। हम बाकी सबकी तरह ही आम लोगों जैसे हैं।
सयानी घोष, टीएमसी सांसद






