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 ट्रंप को बड़ा झटका : अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को बताया ‘अवैध’

वॉशिंगटन। अमेरिका के एक फेडरल ट्रेड कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध घोषित कर दिया है। गुरुवार को आए इस ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है और कांग्रेस की अनुमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर शुल्क लागू करना कानूनन गलत है।

कोर्ट का फैसला और राष्ट्रपति की शक्तियों पर टिप्पणी

इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट के तीन सदस्यीय पैनल ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा: यह टैरिफ 1974 के व्यापार कानून (Trade Act 1974) की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।प्रशासन के पास यह शक्ति नहीं है कि वह विधायी संस्था (कांग्रेस) को दरकिनार कर अपनी मर्जी से आयात शुल्क थोप सके। कोर्ट ने माना कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उन पुराने फैसलों को नजरअंदाज करने की कोशिश थी, जिनमें राष्ट्रपति की इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स को सीमित बताया गया था।

प्रशासन का तर्क खारिज

ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का हवाला देते हुए इस फैसले का बचाव किया था। सरकार का तर्क था कि:  अमेरिका वर्तमान में 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार घाटे से जूझ रहा है।  यह घाटा देश की जीडीपी (GDP) के 4% के बराबर है, जो एक आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति है।

हालांकि, जजों ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल व्यापार घाटे के आधार पर इस तरह के कठोर टैरिफ लगाना कानूनन जायज नहीं ठहराया जा सकता।

खिलौना निर्माताओं की जीत

अदालत के इस फैसले का सबसे अधिक स्वागत उन कंपनियों ने किया है जो ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।बेसिक फन’ कंपनी के CEO जे मय फोरमैन ने इसे अमेरिकी कंपनियों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि इन “गैर-कानूनी” टैरिफ की वजह से कंपनियों का बाजार में टिके रहना मुश्किल हो गया था। इस फैसले से अब उन कंपनियों को राहत मिलेगी जो सस्ते और सुरक्षित उत्पादों के लिए वैश्विक विनिर्माण (Global Manufacturing) का सहारा लेती हैं।

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