रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती का विस्तार कर खाद्य
तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की कवायद तेज हो गई है। तीन दिवसीय प्रदेश प्रवास के अंतिम दिन
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहायक आयुक्त (ऑयल पाम) कृष्णकांत दुबे ने उद्यानिकी
विभाग के अधिकारियों और अनुबंधित ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय
समीक्षा बैठक की।
बैठक में भारत सरकार द्वारा आगामी वर्षों में ऑयल पाम के क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य बढ़ाने तथा अगले वर्ष इस
लक्ष्य को दोगुना करने की योजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
आयात निर्भरता कम करने पर जोर
बैठक में उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालक लोकेश कुमार ने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य केवल
पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों के समुचित विकास और उत्पादन वृद्धि के माध्यम से खाद्य तेलों के
आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है।
किसानों को मिलने वाले अनुदान व सुविधाएं
मिशन के तहत किसानों को निःशुल्क पौधों के साथ-साथ ड्रिप सिंचाई, बोरवेल, पंपसेट, जल संरक्षण संरचना,
वर्मी कम्पोस्ट पिट तथा फसलों को नुकसान से बचाने के लिए वायर मेश पर नियमानुसार सब्सिडी दी जा रही
है।
कृषि मैपर पोर्टल पर अनिवार्य पंजीयन
संचालक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऑयल पाम उत्पादक किसानों का विवरण कृषि मैपर पोर्टल पर
अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए, ताकि योजना की प्रगति की अद्यतन मॉनिटरिंग की जा सके। साथ ही, उत्पादित
फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) की समय पर खरीदी और भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान
वर्चुअल माध्यम से जुड़े किसानों और जिला अधिकारियों ने प्राकृतिक कारणों से पौधों के खराब होने व सिंचाई
सत्यापन में हो रहे विलंब की समस्या रखी। इस पर खराब पौधों के स्थान पर नए गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध
कराने और अंतर-विभागीय समन्वय बनाकर सत्यापन प्रक्रिया समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
राजनांदगांव जिले की सराहना
समीक्षा के दौरान राजनांदगांव जिले में ऑयल पाम योजना के तहत किए गए उत्कृष्ट कार्यों और प्रगति की विशेष
रूप से प्रशंसा की गई।
कंपनियों को नर्सरी स्थापित करने के निर्देश
सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने प्रसंस्करण कंपनियों को किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध
कराने तथा पौधारोपण से लेकर रखरखाव तक आवश्यक तकनीकी सहयोग देने के निर्देश दिए। उन्होंने कंपनियों
को अपनी स्वयं की नर्सरी विकसित करने को कहा और बताया कि इसके लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता
का भी प्रावधान है।






