नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब धरना-प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है। सरकार ने 33 साल पहले यानी 1993 में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत किया था, जहां पिछले तीन दशकों में अन्ना आंदोलन, पहलवानों का ऐतिहासिक धरना और कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शनों समेत कई बड़े आंदोलन गवाह बने हैं।
गृह मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद अब दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए वैकल्पिक स्थल के रूप में तय किया गया है। इन स्थानों के लिए जल्द ही अलग से मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी। हालांकि, इस साल रामलीला मैदान केवल 29 से 31 दिसंबर तक ही खाली उपलब्ध है।
कॉकरोच पार्टी की मांग और हालिया प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग को लेकर सोमवार को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन मांगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया।
इससे पहले CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक NEET पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर धरना दिया था। इस लंबे प्रदर्शन के दौरान प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। 25 जुलाई को मंत्री के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन समाप्त हुआ था।
जंतर-मंतर को हटाने के पीछे कई वजह
सरकार या प्रशासन की ओर से इसे हटाने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन इसके पीछे जंतर-मंतर की संसद भवन से दूरी महज 1.5 किलोमीटर है, जिसके कारण सुरक्षा के लिहाज से इसे संवेदनशील माना जा रहा था। जून-जुलाई में कॉकरोच पार्टी के धरने के दौरान प्रदर्शनकारी संसद के बेहद करीब पहुंच गए थे, जिससे स्थिति को संभालने के लिए संसद के दरवाजे तक बंद करने पड़े थे।
विपक्ष की तैयारी
आने वाले दिनों में विपक्ष सांसद राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता द्वारा भी जंतर-मंतर पर बड़े धरने की तैयारी की जा रही थी। नए तय किए गए स्थल, जैसे रामलीला मैदान संसद से करीब 3-4 किमी दूर है, जबकि बुराड़ी और CBD ग्राउंड शहर के बाहरी हिस्सों में स्थित हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
बीते 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर ऐसी बड़ी और व्यवस्थित जगह तलाशने की बात कही थी, जहां पानी, शौचालय और मेडिकल जैसी बुनियादी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
अब आगे क्या?
जंतर-मंतर के बंद होने से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और एक्टिविस्ट्स के सामने विरोध-प्रदर्शन के लिए सीमित विकल्प ही बचे हैं। प्रशासन द्वारा नए बनाए गए स्थलों रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड पर ही अब सभी बड़े आंदोलनों को अनुमति मिलने की उम्मीद है।






