BREAKING

देशब्रेकिंगहोम

Bengaluru Stampede: ज़िम्मेदार कौन? बेंगलुरु में हुई अफरा-तफरी पर उठे सवाल

RCB (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) की IPL 2025 में ऐतिहासिक जीत ने पूरे शहर को जश्न में डुबो दिया था। एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम से लेकर शहर की गलियों तक, हर तरफ़ ढोल-नगाड़ों, आतिशबाज़ी और नाच-गाने का माहौल था। लेकिन इस जश्न के बीच एक दर्दनाक हादसे ने बेंगलुरु की रफ्तार रोक दी — 11 परिवारों के लिए ये जीत मातम में बदल गई। 


सरकार, पुलिस और क्रिकेट प्रशासन से जुड़े कई पावर सेंटर्स की नाकामी की वजह से क्रिकेट के किसी समारोह के दौरान हुई सबसे बुरी भगदड़, जिसका गवाह बेंगलुरु शहर बन चुका है.

इस घटना के कई पायदानों ने प्रशासन और उसके फ़ैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. लेकिन इन सभी सवालों के जवाब अभी भी कुछ तथ्यों और अनुमानों के दायरे में ही हैं.

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टूर्नामेंट में 18 सालों के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत की ख़ुशी भारत की आईटी राजधानी में इतनी थी कि ये पागलपन की हद तक पहुंच गई.

मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात इस जीत का जश्न पटाख़े फोड़कर मनाया गया. ये हर किसी को साफ़ दिख रहा था कि शहर की पुलिस कई हिस्सों में सुबह 3 बजे तक मुस्तैद खड़ी हुई थी.

लेकिन आरसीबी के ऑफ़िशियल एक्स हैंडल से सुबह 7.01 बजे ये घोषणा की गई कि विक्ट्री परेड विधान सभा से स्टेडियम तक निकाली जाएगी. ये भी घोषणा की गई कि उसके पोर्टल से फ़्री पास डाउनलोड किए जा सकते हैं.

दोपहर 3.14 बजे आरसीबी हैंडल से रोड शो की घोषणा की गई और लोगों से कहा गया कि वो पुलिस और दूसरी अथॉरिटी की ओर से जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन करें.

कौन-से सवाल अभी भी उठ रहे हैं?

इस सवाल के जवाब का अभी भी इंतज़ार है कि किस अथॉरिटी ने आरसीबी को रात 1.45 बजे से सुबह 7 बजे के अंदर ही विक्ट्री परेड की अनुमति दे दी थी.

कर्नाटक के पूर्व डीजीपी एसटी रमेश ने बीबीसी हिंदी से कहा, “आख़िरी ओवर तक हमें नहीं पता था कि कौन ट्रॉफ़ी जीतेगा. 4 जून को टीम बेंगलुरु के लिए रवाना हुई. क्या इन हालात में शहर की पुलिस को बंदोबस्त करने का समय था? ध्यान रखने की बात है कि ये कोई आसान काम नहीं है.”

बंदोबस्त के दौरान ये देखना होता है कि कौन कहां से आएगा और कौन कहां से जाएगा और उस दौरान भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा.

उसी समय ये भी सुनिश्चित करना होता है कि कोई अपराध न हो. ऐसे हालात में जब एक भारी भीड़ इकट्ठा होती है तो ऐसे तत्वों पर नज़र रखना ज़रूरी होता है जो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं. कितनी तादाद में सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा इसकी चर्चा भी होती है और इसको लेकर फ़ैसला लिया जाता है.

रमेश कहते हैं, “क़ानून और व्यवस्था का पहलू भी है. तो क्या पुलिस के पास ये योजना बनाने का समय था? इतने कम समय में पुलिस बल को जुटाने का मतलब है कि आपको पड़ोसी ज़िलों से भी पुलिस बल जुटाना पड़ सकता है. क्या शहर की पुलिस के पास यह सब करने का समय था. किसी को कुछ पता नहीं है.”

आधिकारिक तौर पर बेंगलुरु सिटी पुलिस ने घोषणा की थी कि स्टेडियम में शाम पांच बजे सम्मान समारोह होगा. साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर दोपहर 3.28 बजे एक प्रेस नोट जारी कर ट्रैफ़िक पाबंदियों की घोषणा की गई थी. इसमें ये नहीं बताया गया था कि ये रोड शो होगा या खुली बस की परेड होगी.

इस दौरान कहीं भी पुलिस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसा कोई मैसेज नहीं था कि आरसीबी को विधान सभा से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक विक्ट्री परेड निकालने की इजाज़त नहीं दी गई है.

क्या किया जा सकता था?

बुधवार को दोपहर के समय गृह मंत्री जी परमेश्वर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिटी पुलिस को यह बताने से किसने रोका था कि इतने कम समय में विक्ट्री परेड आयोजित नहीं की जा सकती है? यही सवाल सरकारी और राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक पूछा जा रहा है.

रमेश ने कहा, “आदर्श रूप से तो पुलिस को सत्ताधारियों को यह बताना चाहिए था कि यह संभव नहीं है. अफ़सरों को इसमें सामने आने वाली मुश्किलों के बारे में समझाते हुए कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) और आरसीबी के साथ समन्वय बनाना चाहिए था. हलांकि ऐसा करना लगभग दो दशक पहले तक तो संभव था, लेकिन आज पूरे देश में, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री या गृह मंत्री को ये साफ़ साफ़ बता पाना लगभग नामुमकिन है कि फलां काम करना संभव नहीं है.”

गृह मंत्री की सफ़ाई

हालांकि गृह मंत्री परमेश्वरा ने पत्रकारों से कहा कि पूरा कार्यक्रम केएससीए और आरसीबी ने आयोजित किया था. उन्होंने कहा, “सरकार ने इस समारोह में सिर्फ़ भाग लिया था.”

एक कांग्रेस नेता ने अपना नाम सार्वजनिक ना करने की शर्त पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर सरकार सिर्फ़ समारोह में शामिल हो रही थी तो सवाल ये उठता है कि उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एचएएल एयरपोर्ट जाकर टीम की आगवानी करने की क्या ज़रूरत थी.”

इस भगदड़ के गवाह रहे लोगों ने बताया है कि स्टेडियम के दरवाज़ों पर अफ़रातफ़री सिर्फ़ अंदर घुसने को लेकर मची क्योंकि मुफ़्त पासों को आरसीबी के पोर्टल से हासिल किया जा सकता था.

स्टेडियम के कर्मचारी किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दे रहे थे क्योंकि लोगों के स्टेडियम पहुंचने से पहले ही सभी 32 हज़ार सीटें भर चुकी थीं. इसी दौरान भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई.

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपने एक्स हैंडल से घोषणा की है कि वो भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार वालों को 10-10 लाख रुपए देगी.

BABU RAO

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Wordpress Social Share Plugin powered by Ultimatelysocial
YouTube
Instagram