नई दिल्ली। आखिरकार कांग्रेस की ओर से केरल के मुख्यमंत्री के तौर पर वीडी सतीशन के नाम का ऐलान हो गया। कांग्रेस की ओर से इस नाम की घोषणा करने में जितना अधिक समय लगा उससे एक बात क्लियर है, कि यह फैसला इतना आसान नहीं था। केरल सीएम की रेस में केसी वेणुगोपाल का नाम नतीजों के बाद सबसे आगे चल रहा था। वेणुगोपाल इस पद के लिए कांग्रेस की लगभग सभी अपेक्षाओं पर खरे उतरते दिख रहे थे, लेकिन गुरुवार वीडी सतीशन के नाम का ऐलान हुआ। सतीशन के नाम के ऐलान के बाद बीजेपी नेता ने दावा किया कि केरल में नेतृत्व के चयन को लेकर गांधी परिवार में मतभेद था।
वेणुगोपाल का नाम छूटा पीछे
केरल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने राज्य की कुल 140 सीट में से 102 पर जीत दर्ज की। केसी वेणुगोपाल का पिछले महीने हुए चुनाव में पार्टी को शानदार जीत दिलाने में उनका अहम योगदान रहा। नतीजों के बाद पार्टी के राज्य कार्यालयों के बाहर लगे पोस्टरों में उन्हें ‘नायक’ के रूप में पेश किया गया था। बताया जा रहा है कि वे पार्टी के 63 विधायकों में से 47 की पसंद थे। केंद्र और राज्य स्तर पर मंत्री रह चुके होने के कारण उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी काफी है। 63 वर्षीय वेणुगोपाल को राहुल गांधी का भी समर्थन प्राप्त था। इन सब वजहों से उन्हें सीएम पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था। लेकिन आखिरी वक्त में वह रेस में पीछे छूट गए।
कांग्रेस के फैसले को स्वीकार करूंगा : वेणुगोपाल
शुरू से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि कांग्रेस के फैसले को स्वीकार करूंगा, चाहे वह कुछ भी हो क्योंकि पार्टी ही मेरे लिए सब कुछ है।मैं विनम्रतापूर्वक पार्टी आलाकमान के फैसले को स्वीकार करता हूं और इसके कार्यान्वयन के लिए काम करूंगा। मैं एक वफादार कांग्रेसी हूं। मेरे लिए पार्टी ही सब कुछ है। मैं पार्टी की कीमत पर अपनी छवि नहीं बढ़ाना चाहता।
के सी वेणुगोपाल, कांग्रेस के संगठन महासचिव
इस सवाल का वेणुगोपाल ने नहीं दिया जवाब
वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने कई कारकों के आधार पर और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। उनका कहना था कि वह खुद पर किसी के निजी हमले से नहीं डरते। कांग्रेस महासचिव ने इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया कि क्या मुख्यमंत्री के मुद्दे पर सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की ओर से कोई दबाव था।






