छत्तीसगढ़ के राजनीतिक क्षितिज पर विष्णुदेव साय एक ऐसे नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से राजनीति की पारंपरिक परिभाषा को बदला है। सादगी और सुशासन के प्रतीक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कार्यकाल दो मुख्य स्तंभों पर टिका नजर आता है- पहला, उनका अत्यंत सौम्य और संवेदनशील व्यक्तित्व और दूसरा- कानून-व्यवस्था व प्रशासनिक कसावट को लेकर उनका जीरो टॉलरेंस यानी बेहद सख्त रवैया।
राजनीति में अक्सर माना जाता है कि कड़े फैसलें लेने के लिए स्वभाव में भी आक्रामकता जरूरी है, लेकिन मुख्यमंत्री साय ने यह साबित किया है कि बिना शोर मचाए, सौम्य रहकर भी सबसे कड़े और ऐतिहासिक फैसलें लिए जा सकते हैं।
सौम्य व्यक्तित्व : जनता से सीधा जुड़ाव और संवेदनशीलता
विष्णुदेव साय का व्यक्तित्व छत्तीसगढ़ की माटी की तरह ही सीधा, सरल और सहज है। जशपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के बाद भी उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है।
वे एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनसे मिलने के लिए आम जनता को कड़े प्रोटोकॉल से नहीं गुजरना पड़ता। जनदर्शन हो या कोई सार्वजनिक मंच, वे समाज के अंतिम व्यक्ति की बात भी उतनी ही आत्मीयता से सुनते हैं, जितनी किसी वीआईपी की।
मुख्यमंत्री पद संभालते ही उन्होंने सबसे पहले गरीब परिवारों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी। यह निर्णय उनकी अंत्योदय के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके साथी और प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री कभी भी अधिकारियों पर चिल्लाते या आपा खोते नहीं दिखते। वे शांत रहकर अपनी बात कहते हैं, लेकिन उनकी बात में जो वजन होता है, उसे पूरी ब्यूरोक्रेसी बखूबी समझती है।
सख्त प्रशासन : अपराधियों और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
एक तरफ विष्णुदेव साय का दिल गरीबों और आम जनता के लिए पसीजता है, तो दूसरी तरफ वे कानून तोड़ने वालों और भ्रष्टाचारियों के लिए एक सख्त प्रशासक की भूमिका में आ जाते हैं। उनके प्रशासन की धमक ने राज्य के भीतर एक नया नैरेटिव सेट किया है।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक और निर्णायक अभियान चलाया जा रहा है। गोली का जवाब गोली से की नीति अपनाते हुए सुरक्षा बलों को खुली छूट दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों का खात्मा और आत्मसमर्पण हुआ है। पिछली व्यवस्थाओं में हुए कथित घोटालों (जैसे पीएससी घोटाला, कोयला और शराब घोटाला) की जांच को उन्होंने गति दी। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही तय
सौम्य मुख्यमंत्री का मतलब यह कतई नहीं है कि ढिलाई बर्दाश्त की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले, जनता के काम अटकाने वाले और समय पर योजनाओं का क्रियान्वयन न करने वाले अधिकारियों पर तत्काल गाज गिरती है। जिला कलेक्टरों से लेकर मैदानी अमले तक, सबको स्पष्ट निर्देश हैं काम समय पर होना चाहिए।
मोदी की गारंटी पर ‘साइलेंट’ एक्शन
विष्णुदेव साय का काम करने का तरीका ‘काम ज्यादा, शोर कम’ वाला है। उन्होंने चुनाव के दौरान किए गए बड़े वादों को बिना किसी प्रशासनिक हल्ले के चुपचाप लागू कर दिखाया। किसानों को 3100 प्रति क्विंटल धान की कीमत और दो साल का बकाया बोनस एकमुश्त देना। महतारी वंदन योजना के तहत लाखों महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने समय पर 1000 की राशि सीधे ट्रांसफर करना और तेंदूपत्ता संग्राहकों के मानदेय में वृद्धि कर सीधे तौर पर वनवासियों को आर्थिक मजबूती देना। इन सभी बड़े आर्थिक फैसलों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए लागू करना एक कुशल और दृढ़ संकल्पी प्रशासक ही कर सकता है।




