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एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई सबूत नहीं : माइलेज सड़क और ट्रैफिक पर निर्भर – नितिन गडकरी

नई दिल्ली। देश में ई-20 (20% एथेनॉल ब्लेंडेड) पेट्रोल, गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर इसके असर को लेकर चल रही बहसों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातें भ्रामक हैं और एथेनॉल मिक्सिंग से गाड़ियां खराब होने का देश में अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला है।

गडकरी ने कहा कि वैकल्पिक ईंधन भारत की मजबूरी नहीं बल्कि भविष्य की जरूरत है, जिससे प्रदूषण घटेगा, भारी-भरकम तेल आयात बिल कम होगा और देश के किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

गाड़ियों की खराबी और माइलेज पर क्या बोले परिवहन मंत्री?

ई-20 पेट्रोल को लेकर आम जनता की शिकायतों और चिंताओं पर नितिन गडकरी ने स्थिति स्पष्ट की-

गडकरी ने कहा- देश में साल 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। पिछले 22 सालों में एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण किसी की गाड़ी का इंजन खराब होने का कोई प्रामाणिक डेटा या सबूत सामने नहीं आया है।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा माइलेज में 6% तक की कमी की बात स्वीकारते हुए उन्होंने कहा कि एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू (Calorific Value) पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, जिससे मामूली अंतर आ सकता है। लेकिन हकीकत में किसी भी गाड़ी का माइलेज सड़क की क्वालिटी और ट्रैफिक की स्थिति पर ज्यादा निर्भर करता है।

उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में जब फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (जो 100% एथेनॉल पर भी चल सकते हैं) पूरी तरह बाजार में आ जाएंगे, तो माइलेज का यह मामूली अंतर भी खत्म हो जाएगा।

भारत के पास जरूरत से ज्यादा एथेनॉल क्षमता : आंकड़े

जब गडकरी से पूछा गया कि क्या भारत ई-20 के लक्ष्य के लिए पर्याप्त एथेनॉल बना पा रहा है, तो उन्होंने देश की उत्पादन क्षमता के मजबूत आंकड़े सामने रखे-

  • देश की मौजूदा एथेनॉल जरूरत – 1,450 करोड़ लीटर (सालाना)
  • भारत की कुल उत्पादन क्षमता – 1,750 से 1,800 करोड़ लीटर |
  • अब तक हुई बचत (तेल आयात) – 2 लाख करोड़ रुपए|
  • कच्चे माल के स्रोत –  गन्ना,  मोलासेस, मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस|

क्रूड ऑयल सस्ता होने पर भी एथेनॉल जरूरी क्यों?

गडकरी ने माना कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आता है, तो एथेनॉल की आर्थिक बढ़त थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा मकसद सिर्फ पैसा बचाना नहीं है। देश की ऊर्जा सुरक्षा, दिल्ली जैसे शहरों में 40% परिवहन प्रदूषण को कम करना और भारत को आत्मनिर्भर बनाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।

हाईवे के गड्ढों पर एक्शन: ठेकेदारों की ‘एक्स-रे’ जांच और ब्लैकलिस्टिंग

  • नेशनल हाईवे पर गड्ढों की शिकायतों (जैसे दिल्ली-देहरादून राजमार्ग) पर परिवहन मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि सड़कों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।
  • मंत्रालय अब सड़कों की आंतरिक गुणवत्ता जांचने के लिए एक आधुनिक मशीन का इस्तेमाल कर रहा है, जो इंसानी एक्स-रे की तरह सड़क की कमियां पकड़ लेती है।
  • गडकरी ने बताया कि पिछले महीने उन्होंने राज्यों के 950 प्रोजेक्ट्स की खुद समीक्षा की है। गड़बड़ी करने वाली कई कंपनियों को ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) किया गया है।
  • अब ठेकेदारों के काम के आधार पर उनकी रेटिंग तय की जा रही है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

सुविधा की नहीं, सिद्धांतों की राजनीति करता हूँ

अपनी बेबाक और स्पष्टवादी छवि के लिए जाने जाने वाले नितिन गडकरी से जब पूछा गया कि क्या उन्हें कभी इस बेबाकी की राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी? तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- मैं सुविधा की नहीं, सिद्धांतों की राजनीति करता हूं। राजनीति मेरे लिए सत्ता हथियाने का जरिया नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक माध्यम है।

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