नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले में भारी दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इस मामले को लेकर पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार धरना दे रही थी।
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने दो पन्नों और 575 शब्दों की एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उन्होंने अन्य बातों के अलावा दो स्थानों पर युवाओं को भ्रमित किए जाने का भी उल्लेख किया है।
12 साल में विरोध के चलते इस्तीफा देने वाले पहले मंत्री
वर्ष 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से 12 वर्षों के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान ऐसे पहले मंत्री बन गए हैं, जिन्हें जन-विरोध के कारण अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।


दीपके बोले- कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा- वे कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो मांगें अभी बाकी हैं और हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं।
CJP की प्रमुख मांगें
* NEET मामले के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
* संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।
इस्तीफे के तुरंत बाद CJP ने सोशल मीडिया पर संदेश पोस्ट करते हुए इसे कॉकरोच की जीत करार दिया।
सोनम वांगचुक ने बताया लोकतंत्र की जीत
अस्पताल से एक पोस्ट शेयर करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे जनता की ताकत की जीत बताया। उन्होंने कहा यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र और सड़कों से मिली जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और GenZ को बधाई। देश के हर कोने से आवाज उठाने के लिए सभी नागरिकों का धन्यवाद।
मोहन भागवत के बयान के बाद इस्तीफा
शनिवार सुबह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली के एक कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था- हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता। आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। भागवत के इस बयान के सामने आने के तुरंत बाद ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आया।
सरकार की ताबड़तोड़ कार्रवाइयां
इस्तीफे से ठीक पहले सरकार ने NEET मामले में कई बड़े कदम उठाए हैं।
* गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों का बदलाव किया गया है।
* शुक्रवार की रात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किया गया और उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात कही गई।
* शनिवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
दीपके ने कहा ने कहा था – BJP कहती थी, हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते
जून 2015 में भगोड़े ललित मोदी मामले में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते हैं, यह UPA सरकार नहीं है। इस संदर्भ को याद दिलाते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक दबाव बनाने का दावा किया है।






