प्रकृति ने हमें कई ऐसी फल-सब्जियां दी हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती हैं। ‘तुरई’ भी इन्हीं में से एक है।
इसे स्थानीय तौर पर हिंदी में ‘तुरई या तोरई’, बंगाली में ‘झिंगे’, तेलुगु में ‘बीरकाया’ और तमिल में ‘पीरकंगई’ जैसे नामों से जाना जाता है। यह हरी और गूदेदार सब्जी बहुत नरम होती है। इसे बनाना बेहद आसान होता है और ये सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
तुरई में विटामिन A, C, आयरन, मैग्नीशियम समेत कई न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स और अल्कलाइन कंपाउंड भी होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम तुरई खाने के फायदों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- तुरई में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
- किन लोगों को तुरई नहीं खानी चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
सवाल- तुरई में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
सवाल- तुरई, लौकी परिवार से संबंधित सब्जी है, जो भारत में व्यापक रूप से उगाई और खाई जाती है। तुरई साइज में लंबी और गहरे हरे रंगी होती है। इसमें कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 178 ग्राम तुरई की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए
सवाल- तुरई खाने के क्या हेल्थ बेनिफिट्स हैं?
जवाब- तुरई में पर्याप्त फाइबर होता है, जिससे पाचन तंत्र हेल्दी रहता है और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं। इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। साथ ही ये शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने मे मदद करती है।
‘द फार्मा इनोवेशन’ जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तुरई वजन घटाने में मददगार हो सकती है क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है। यह फाइबर से भरपूर होती है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने की इच्छा कम हो जाती है।
‘साइंस डायरेक्ट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, तुरई, पोटेशियम का अच्छा सोर्स होने के कारण हार्ट को हेल्दी रखती है। तुरई में पानी की मात्रा पर्याप्त होती है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखती है और शरीर का तापमान कंट्रोल करके गर्मी को कम कर सकती है। गर्मियों में तुरई एक नेचुरल कूलर की तरह काम करती है।
इसकी एक खासियत यह है कि यह अल्कलाइन नेचर की होती है, जो पेट की अम्लता को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही यह शरीर का pH लेवल संतुलित रखने में भी सहायक है। तुरई में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।






