भाटापारा। देश में केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों को इस महंगाई के दौर में उन्हें राहत पहुंचाने के लिये कई सारी योजनायें आरंभ की है। मसलन गैस में सब्सिडी, महतारी वंदन योजना, किसान पोर्टल व राशन कार्ड से निम्न आय वालों को निःशुल्क या एक-दो रुपए किलो में चावल तथा सामान्य राशन कार्ड धारियों को दस रुपए प्रति किलो की दर पर चावल दिया जाता है। इसके लिये यहां के लोग शासन के प्रति कृतज्ञता भी जताते हैं, लेकिन इन योजनाओं के लिये अचानक ही शासन द्वारा हर नागरिकों को केवाईसी करवाने के लिये विवश किया जा रहा है। इससे यहां के सभी नागरिक हलाकान हो रहे हैं।
राशन कार्ड में महिलाओं को बनाया गया है मुखिया
प्रदेश में कुछ समय पूर्व ही शासन द्वारा समस्त एपीएल व बीपीएल राशन कार्डधारियों के लिए केवाईसी करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे यहां का आम नागरिक परेशान व दुःखी है। एक राशन कार्ड में यदि 8 से 10 परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज है, जिसमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल है, तो सभी को राशन दुकानों में उपस्थित होकर इस प्रक्रिया को करना पड़ रहा है। सबसे अहम बात यह है कि शासन ने कुछ वर्षों पूर्व राशन कार्ड में मुखिया के रूप में महिला को प्राथमिकता दी। इस कारण यहां प्रायः सभी राशन कार्डों में महिला मुखिया के ही नाम दर्ज है, जिससे महिलाओं खासकर बुजुर्ग महिलाओं को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
हाथों की लकीर का आधार कार्ड से नहीं हो रहा मिलान
दूसरी सबसे बड़ी बात यह है कि हर राशन कार्डधारी परिवारों में बहुत से ऐसे परिवार है, जिनके परिवार के बुजुर्गाें के हाथों की लकीरें ही मिट गई है। ऐसे में उनकी लकीरें उनके पास उपलब्ध आधार कार्ड से मिलान नहीं हो रही है। ऐसी स्थिति में ऐसे परिवार क्या करें? इस बात पर छ.ग.शासन का स्पष्ट आदेश नहीं है।इससे यहां के सैकड़ों परिवार असमंजस की स्थिति में है।
कई बुजुर्गाें के बंद हुए राशन
भाटापारा नगर के बजरंगवार्ड, मातादेवालय वार्ड, संत कंवर राम वार्ड, शांतिनगर व इसके आस-पास के क्षेत्र के राशन दुकान के सेल्समैनों ने समय पर केवाईसी करवाने के लिये उपभोक्ताओं को जानकारी नहीं दी। जब यहां के बहुत से राशन कार्डधारियों के कार्ड बंद हो गये, तब यहां के सेल्समैनों ने उन्हें यह बात बतायी।
बुजुर्गाें के लिए विकल्प निकाले सरकार
संत कंवर राम वार्ड के वरिष्ठ नागरिक डॉ. चंदीराम ग्वालानी ने उपरोक्त जानकारी देते हुये कहा कि शासन को बुजुर्गों जिनके हाथों का लकीरें मिट गई है को राहत देने के लिये किसी अन्य विकल्पों पर ध्यान देना चाहिये।






