बिहार

बांके बिहारी कॉरिडोर : विस्थापितों के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति

मथुरा। वृन्दावन के विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में जनसुविधाओं के विस्तार और प्रस्तावित कॉरिडोर निर्माण को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। कॉरिडोर निर्माण के कारण विस्थापित होने वाले दुकानदारों और भवन स्वामियों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने अब ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के सिद्धांत को अपनाने का निर्णय लिया है।

हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य सचिव और जिला मजिस्ट्रेट चन्द्र प्रकाश सिंह ने जानकारी दी है कि मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए विस्थापित होने वाले लोगों को दुकानों और फ्लैटों का आवंटन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के सिद्धांत पर किया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार, गठित कमेटी की 14वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि जो संपत्ति स्वामी अपनी दुकान या भवन का बैनामा रजिस्ट्री सबसे पहले ठाकुर बांके बिहारी महाराज के नाम करेंगे। उन्हें ही वरीयता क्रम में नई दुकान या फ्लैट का आवंटन सबसे पहले किया जाएगा।

विस्थापितों के लिए क्या है व्यवस्था

मंदिर प्रबंधन कमेटी श्रद्धालुओं की सुविधा और स्थानीय निवासियों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। प्रभावितों के लिए दुकान के बदले दुकान व्यापारियों को उनके स्थान के बदले नई दुकान दी जा रही है। मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा सुनरख एवं रुकमणि विहारमें आधुनिक फ्लैट्स दिए जा रहे हैं। विकास क्षेत्र में आने वाले निवासियों को पर्याप्त धनराशि भी प्रदान की जा रही है।

क्यों जरूरी है यह विकास कार्य

प्रशासन के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण, बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और सुगम प्रवेश-निकासी द्वार उपलब्ध कराना है। इससे संकरी गलियों में भीड़ का दबाव कम होगा। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इस पुनीत कार्य के लिए लोग निरंतर आगे आ रहे हैं।

मैनेजमेंट कमेटी में ये हैं शामिल

इस हाई पावर्ड कमेटी में अध्यक्ष सेवानिवृत्त जज अशोक कुमार , पूर्व जिला जज मुकेश मिश्रा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार, मुंसिफ/सिविल जज मथुरा, जिला मजिस्ट्रेट चन्द्र प्रकाश सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार, नगर आयुक्त जग प्रवेश और उपाध्यक्ष MVDA लक्ष्मी एन शामिल हैं। साथ ही गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि (राजभोग एवं शयन भोग समूह) भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

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