बिहार

स्वास्थ्य मंत्री बनते ही निशांत कुमार एक्शन में : अधिकारियों के समक्ष रखे 11 फरमान 

पटना। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री बनते ही पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ऐक्शन में आ गए हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद निशांत ने शुक्रवार को अपने कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने 11 पॉइंट पर निर्देश जारी कर दिए। निशांत कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा है। साथ ही मरीजों के पूरे मेडिकल डेटा को डिजिटलाइज करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने पदभार ग्रहण करने के बाद विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बीते 20 सालों में सरकार ने काफी काम किया है। इसी का परिणाम है कि स्वासअत्य सूचकांकों में सुधार आए। निशांत ने कहा कि इन कामों को और गति दी जाएगी। आम जनता को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा देने के लिए सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत के 11 पॉइंट –

* भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का कड़ाई से पालन करें। जनता को बेहतर, सुलभ एवं पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

* आर्सेनिक, आयरन युक्त और अशुद्ध पेयजल से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कदम उठाएं। पीएचडी विभाग से समन्यवय स्थापित करें। पानी की गुणवत्ता को बेहतर करके ऐसी बीमारियों से कम करें।

* मरीजों का पूरा चिकित्सा रिकॉर्ड डिजिटलाइज किया जाए।

* आयुष चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने वाले मरीजों का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो।

* अस्पतालों में आने वाले मरीजों से इलाज संबंधित फीडबैक लिया जाए।

* ट्रॉमा सेंटर को मानक रूप से क्रियाशील बनाएं, सड़क हादसों के क्षेत्रों को चिह्नित कर जरूरत के अनुसार एंबुलेंस आदि सुविधा सुनिश्चित की जाए।

* ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए चिकित्सकों को प्रोत्साहन दिया जाए।

* सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक खाली पदों को भरा जाए।

* सभी छोटे-बड़े अस्पतालों में स्वास्थ्य उपकरणों, दवाइयों की सप्लाई आदि की समीक्षा करें। पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच की सुविधाओं के गैप को पूरा किया जाए। सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) में यथासंभव विशेषज्ञों की सेवा ली जाए। जिला अस्पतालों में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी जैसे अति विशिष्ट विशेषज्ञों की सेवा ली जाए।

* ऑपरेशन थियेटर की साफ-सफाई का मानकों के अनुसार पूरा ख्याल रखा जाए।

* स्वास्थ्य विभाग के पूरे सिस्टम को जनता के लिए सुलभ और उपयोगी बनाया जाए। गंभीर बीमारी के मरीजों को बिहार से बाहर नहीं जाना पड़े, इस दिशा में भी काम हो।

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