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5 रुपए प्रति लीटर महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल : देश में 60 दिन का तेल, 45 दिनों की LPG 

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-हॉर्मुज संकट का असर अब भारत में दिखायी देने लगा है। एक तरफ सरकार लगातार भरोसा दिला रही है कि देश में कच्चे तेल, गैस और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी तेल कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की संभावना है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 5 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाई जा सकती हैं।

विदित हो कि, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। भारत में कच्चे तेल की सप्लाई का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। लेकिन, ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से इस समुद्री रास्ते पर दबाव बढ़ गया है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

कंपनियां प्रतिदिन झेल रही लगभग 1000 करोड़ का नुकसान  

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां फिलहाल हर दिन करीब 1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। इस नुकसान को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि कंपनियों का पूरा नुकसान कवर करने के लिए 15 से 20 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी जरूरी होगी, लेकिन इतना बड़ा फैसला आम जनता और अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है।

भारत में 60 दिनों का तेल स्टॉक

इसी बीच सरकार ने लोगों से घबराकर पेट्रोल या एलपीजी जमा न करने की अपील की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि भारत के पास फिलहाल 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार मौजूद है, जबकि एलपीजी का लगभग 45 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा देश के विदेशी मुद्रा भंडार भी 703 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर हैं।

प्रधानमंत्री ने पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करने की अपील की

फिर भी सरकार ईंधन बचाने पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि ईंधन की बचत केवल पैसे बचाने का तरीका नहीं, बल्कि देश की विदेशी मुद्रा और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का भी माध्यम है।

मौजूदा संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी

सरकार अब लंबी अवधि की रणनीति पर भी काम कर रही है। इसमें सौर ऊर्जा, सीएनजी, पीएनजी और एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि भारत की विदेशी तेल पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सके। एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर और तेजी से कदम उठाने होंगे। फिलहाल, राहत की बात यह है कि देश में तेल और गैस की कमी नहीं है, लेकिन अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

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