छत्तीसगढ़

डोंगरगढ़ के बागरेकसा धान उपार्जन केंद्र में 52 लाख का डिजिटल घोटाला :  प्रति बोरा 2 किलो फर्जी कमी दिखाकर 1,696 क्विंटल धान का गबन

 डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के शासकीय धान खरीदी सिस्टम में एक बड़े फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विकासखंड डोंगरगढ़ के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बागरेकसा (धान उपार्जन केन्द्र बागरेकसा) में प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त जांच दल के औचक निरीक्षण और सघन जांच में 52,57,786 रुपये मूल्य के कुल 1,696.06 क्विंटल धान का गबन पकड़ा गया है। समिति के कर्मचारियों ने सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी कंप्यूटर रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया है।

भौतिक सत्यापन में एक किलो धान भी नहीं मिला शेष

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संयुक्त जांच दल द्वारा उपार्जन केंद्र बागरेकसा का विस्तृत भौतिक सत्यापन एवं रिकॉर्ड मिलान किया गया। निरीक्षण के दौरान मौके पर केंद्र प्रभारी-समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू और डाटा एंट्री ऑपरेटर ओम कुमार यादव उपस्थित थे।

जब जांच दल ने ऑनलाइन रिपोर्ट और वास्तविक रिकॉर्ड का मिलान किया, तो आंकड़े चौंकाने वाले थे। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में इस केंद्र द्वारा कुल 1,64,169 बोरियों में कुल 65,627.60 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। इसमें से 29,501.46 क्विंटल धान राइस मिलर्स को तथा 34,430.08 क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों को प्रदाय (कुल 63,931.54 क्विंटल) किया गया था। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में 1,696.06 क्विंटल धान शेष होना अनिवार्य था, परंतु भौतिक सत्यापन में उपार्जन केंद्र परिसर के भीतर न तो बोरियों में और न ही खुले में एक किलोग्राम भी धान पाया गया। पूरा स्टॉक गायब था।

सूखत का बहाना बनाकर सच छुपाने की कोशिश

पूछताछ में समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू एवं ऑपरेटर ने भौतिक रूप से गायब धान को सूखत (धान सूखने के कारण आई कमी) होना बताया। उन्होंने यह भी दलील दी कि मिलर्स को धान देते समय रैंडम वजन नहीं किया गया था। हालांकि, जब जांच दल ने धर्मकांटा (वेब्रिज) से प्राप्त वास्तविक वजन पत्रकों की तुलना समिति के कंप्यूटर मॉड्यूल में की गई ऑनलाइन प्रविष्टियों से की, तो एक बड़े और सुनियोजित डिजिटल घोटाले की पुष्टि हुई। आरोपियों ने धर्मकांटा के वास्तविक वजन की एंट्री न करते हुए काल्पनिक एवं फर्जी आंकड़ों की ऑनलाइन प्रविष्टि की थी, ताकि 1,696.06 क्विंटल धान को कागजों पर सूखत दिखाकर हजम किया जा सके।

 कंप्यूटर सिस्टम में धोखाधड़ी का शॉर्टकट पैटर्न

आरोपियों द्वारा कंप्यूटर मॉड्यूल में प्रत्येक परिवहन वाहन में काल्पनिक रूप से प्रति बोरा 2 किलोग्राम की कमी दर्ज की गई थी। धोखाधड़ी का यह चालाकी भरा पैटर्न इस प्रकार पाया गया कि वास्तविक वजन छुपाकर काल्पनिक रूप से सीधे 17.50 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई।
* 800 बोरियों वाले वाहन में सीधे 16.00 क्विंटल धान की फर्जी कमी दिखाई गई।
*  700 बोरियों वाले वाहन में रिकॉर्ड में 14.00 क्विंटल की मनगढ़ंत कमी दर्ज की गई।
* 600 बोरियों वाले वाहन में 12.00 क्विंटल धान की फर्जी कटौती की गई।
* 500 बोरियों वाले वाहन में कंप्यूटर मॉड्यूल में 10.00 क्विंटल धान की फर्जी कमी दर्ज की गई।

जावक पर्चियों ने खोली पोल, कूटरचना उजागर

इस पूरे फर्जीवाड़े की पोल तब खुली जब जांच दल ने संग्रहण केंद्रों को भेजे गए धान की जावक (आउटवर्ड) पर्चियों का मिलान किया। इन पर्चियों पर धर्मकांटा का वास्तविक और सही वजन दर्ज था। इससे यह साफ हो गया कि समिति प्रबंधक और ऑपरेटर द्वारा राइस मिलर्स को भेजे जाने वाले धान में जानबूझकर, कूटचरित (फोर्ज्ड) तरीके से प्रति बोरा 2 किलो की काल्पनिक कमी दिखाई गई और कुल 1,696.06 क्विंटल धान को कागजों पर गायब कर दिया गया।

दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी

शासकीय संपत्ति के इस गंभीर वित्तीय गबन और धोखाधड़ी के मामले में जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर दोषी समिति प्रबंधक नीलकंठ साहू, ऑपरेटर ओम कुमार यादव एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन द्वारा इनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक एवं कानूनी दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई से जिले के अन्य उपार्जन केंद्रों के भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।

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