छत्तीसगढ़

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुनिया का सबसे निडर जीव ‘हनी बैजर’ : कैमरे में कैद हुई दुर्लभ कबरबिज्जू की तस्वीर

धमतरी। छत्तीसगढ़ के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक बेहद सुखद और रोमांचित करने वाली खबर सामने आई है। रिजर्व के घने जंगलों में लगाए गए ट्रैप कैमरे में दुनिया के सबसे निडर और आक्रामक जीव ‘हनी बैजर (जिसे स्थानीय भाषा में कबरबिज्जू भी कहा जाता है) की तस्वीर कैद हुई है। वन विभाग ने इस अत्यंत दुर्लभ जीव की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसकी तस्वीरें साझा की हैं।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के मुताबिक, इस क्षेत्र में हनी बैजर का पाया जाना यह साबित करता है कि यहां का वनक्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है और यहां एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है।

गिनीज बुक में दर्ज है ‘मोस्ट फियरलेस’ का खिताब

वैज्ञानिक रूप से मेलिवोरा कैपेंसिस के नाम से जाने जाने वाले हनी बैजर के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है। अपनी अत्यधिक निडरता और भयंकर रक्षात्मक क्षमता के कारण इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में ‘दुनिया के सबसे निडर जानवर’ का दर्जा दिया गया है। आकार में उदबिलाव जैसा छोटा दिखने वाला यह जीव स्वभाव से इतना आक्रामक होता है कि संकट आने पर यह शेर, तेंदुए और लकड़बग्घे जैसे बड़े और भारी-भरकम शिकारियों से भी सीधे भिड़ जाता है।

कुदरत का अनोखा सुरक्षा कवच और रासायनिक हथियार

वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, नेवला परिवार  से ताल्लुक रखने वाला यह स्तनपायी जीव शारीरिक रूप से बेहद अनूठा होता है। इसकी पीठ पर सफेद-ग्रे रंग की चादर जैसी मोटी और ढीली त्वचा होती है, जबकि शरीर का निचला हिस्सा काला होता है। यह त्वचा इतनी सख्त होती है कि इस पर मधुमक्खियों के डंक, जहरीले सांपों के काटने और यहां तक कि हिंसक जानवरों के नुकीले दांतों का भी असर नहीं होता।

जब यह खुद को बड़े खतरे में पाता है, तो इसके शरीर की एक विशेष ग्रंथि से बेहद तीखी और असहनीय दुर्गंध निकलती है। इस जैविक हथियार के आगे बड़े से बड़ा शिकारी भी दुम दबाकर भागने पर मजबूर हो जाता है।

रात का राजा : खान-पान और अनोखी जीवनशैली

हनी बैजर मुख्य रूप से एक रात्रिचर जीव है, जो रात के अंधेरे में घने जंगलों, झाड़ियों और घास के मैदानों में शिकार के लिए निकलता है। यूं तो यह बेहद खतरनाक और जहरीले सांपों को भी आसानी से मारकर खा जाता है, लेकिन इसे शहद  और मधुमक्खी के लार्वा सबसे ज्यादा प्रिय हैं; यही वजह है कि इसका नाम ‘हनी बैजर’ पड़ा। इसके अलावा यह कीड़े-मकोड़े, पक्षियों के अंडे, फल और पौधों की जड़ें भी चाव से खाता है।

पर्यावरण और किसानों का ‘गुप्त मददगार’

यह जीव मिट्टी में गहरे और सुरक्षित बिल बनाने में माहिर होता है। वन अधिकारियों का कहना है कि इसके बिल खोदने की आदत से जंगलों की जमीन में हवा और पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता  में सुधार होता है। साथ ही, यह फसलों और वनों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीट-पतंगों को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित रखता है।

वन विभाग ने लगाये ट्रैप कैमरों

हनी बैजर की मौजूदगी हमारे संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है। फिलहाल, वन विभाग ट्रैप कैमरों और विशेष मैदानी टीमों के माध्यम से रिजर्व में इस दुर्लभ जीव और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है, ताकि उनके सुरक्षित रहवास को और मजबूत किया जा सके।

वरुण जैन, उपनिदेशक, उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व

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