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जंगल की महक ने शहर में बनायी पहचान : मुख्यमंत्री साय की पहल से जशपुर में महुआ को मिल रहा नया स्वरूप

विशेष लेख
जयंत देवांगन, संयुक्त संचालक
सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक जनसंपर्क

रायपुर। कभी जंगलों में सहज रूप से मिलने वाली वन उपज और पारंपरिक उपयोग तक सीमित महुआ आज नए रूप, नई पहचान और नई संभावनाओं के साथ बाजार तक पहुंच रहा है। जशपुर में महुआ को केवल वन उपज के रूप में नहीं, बल्कि खाद्य नवाचार, मूल्य संवर्धन, अनुसंधान और जनजातीय आजीविका के अवसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों ने महुआ की पहचान को नई ऊंचाई दी है।
इसी बदलाव की झलक रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देखने को मिली, जहां जशप्योर और जय जंगल के स्टॉल पर जशपुर के महुआ आधारित उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने महुआ से तैयार विभिन्न खाद्य उत्पादों को देखा, उनके बारे में जानकारी ली और उनकी गुणवत्ता, स्वाद तथा आधुनिक पैकेजिंग की सराहना की।

महुआ की बदली तस्वीर, पारंपरिक वन उपज से आधुनिक फूड प्रोडक्ट तक

महुआ का नाम सुनते ही लंबे समय तक लोगों के मन में इसकी पारंपरिक उपयोगिता की ही तस्वीर उभरती रही। जशपुर में इसी धारणा को बदलते हुए महुआ को आधुनिक खाद्य उत्पादों के रूप में विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। अब महुआ केवल जंगल से संग्रहित होने वाली वन उपज नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के जरिए बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला उत्पाद बन रहा है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर के हॉल नंबर-3 के स्टॉल नंबर 4 एवं 5 पर महुआ नेक्टर, महुआ नेक्टर गोल्ड, वन्यप्राश, महुआ एनर्जी पाचक, महुआ टी, महुआ आधारित कुकीज़, रागी-महुआ उत्पाद, महुआ लड्डू और फूड-ग्रेड महुआ फूल सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए।

जशप्योर बना स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन का माध्यम

जशपुर की पहचान केवल अपने जंगलों और प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों से भी जुड़ी है। इसी स्थानीय ताकत को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में जशप्योर के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय, महिला समूहों, उत्पादक संस्थाओं और तकनीकी संस्थानों के साझा प्रयासों से महुआ सहित स्थानीय वन उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव पर काम हो रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को स्थानीय स्तर पर ही अधिक मूल्यवान बनाना और उनसे जुड़े परिवारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर तैयार करना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्थानीय एवं जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। जशपुर में महुआ को लेकर हो रहे प्रयास इसी सोच को जमीन पर साकार करते हुए दिखाई देते हैं।

पेड़ से बाजार तक तैयार हो रही पूरी वैल्यू चेन

महुआ की कहानी केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पेड़ से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रयास है। स्वच्छ और फूड-ग्रेड संग्रहण से लेकर डिहाइड्रेशन, प्रसंस्करण, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक प्रत्येक चरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। जिला प्रशासन जशपुर के सहयोग से संचालित Mahua Centre of Excellence और ‘Mahua Kosh’ में महुआ के खाद्य उपयोग, नए उत्पादों, फूड-ग्रेड कलेक्शन, डिहाइड्रेशन और प्रसंस्करण तकनीक सहित विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं प्रयोग किए जा रहे हैं।

पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही नई पीढ़ी

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशप्योर एवं जय जंगल के स्टॉल का प्रतिनिधित्व जशपुर की अनेश्वरी भगत और गणपति बाई कर रही थीं। वे आगंतुकों को केवल उत्पादों की जानकारी ही नहीं दे रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि महुआ का संग्रहण किस तरह किया जाता है, उसे फूड-ग्रेड बनाने के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया है और किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है।

अनुसंधान से पोषण की नई संभावनाओं की तलाश

महुआ के खाद्य उपयोग के विस्तार के साथ इसके पोषण संबंधी पहलुओं पर भी अनुसंधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। जय जंगल के निदेशक समर्थ जैन ने बताया कि ग्राहकों से महुआ के सेवन के बाद आयरन और हीमोग्लोबिन से जुड़े सकारात्मक अनुभवों की बातें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों को वैज्ञानिक रूप से समझना जरूरी है और महुआ में आयरन की मात्रा के साथ शरीर में उसकी उपलब्धता एवं उपयोगिता का व्यवस्थित अध्ययन अगला महत्वपूर्ण कदम है।

जशपुर के जंगलों से देश-दुनिया तक पहुंचने की राह

14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में जशपुर के महुआ उत्पादों को मिली प्रतिक्रिया केवल किसी एक उत्पाद की लोकप्रियता की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें स्थानीय संसाधन, जनजातीय परंपरा, महिला समूहों की भागीदारी, प्रशासनिक सहयोग, तकनीकी ज्ञान और उद्यमिता एक साथ आकर नई आर्थिक संभावनाओं का निर्माण कर रहे हैं। जशपुर के जंगलों से निकलकर महुआ अब बाजार की नई भाषा बोल रहा है-स्थानीय संसाधन से मूल्य संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान से नवाचार और वन उपज से आजीविका तक। यही बदलाव जशपुर के महुआ को नई पहचान दे रहा है।

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