छत्तीसगढ़

मावली माता मंदिर में जोगी बिठाई की रस्म पूरी : तपस्या में बैठे जोगी

जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के अंतर्गत सोमवार को ऐतिहासिक जोगी बिठाई की रस्म पारंपरिक विधि-विधान और लोक आस्था के साथ की गई। जोगी की 9 दिवसीय कठिन तपस्या शुरू हो गई। हल्बा समुदाय के युवक रघुनाथ नाग ने मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए बस्तर दशहरा निर्विघ्न संपन्न होने तथा बस्तर अंचल में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ साधना का संकल्प लिया।

मावली माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मोहरी बाजा की धुन के बीच जोगी को सिरहासार भवन लाया गया, जहां निर्धारित कुंड में उन्हें विधिवत बैठाया गया। जोगी बिठाई की रस्म में परंपरागत रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। निर्धारित परंपरा के अनुसार, जोगी को नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद मांझी, चालकी और पुजारी सहित पारंपरिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में मावली माता मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। देवी आराधना के साथ पारंपरिक तलवार की भी पूजा की गई।

धार्मिक अनुष्ठानों और परंपरागत तैयारियों के बाद जोगी को मोहरी बाजा के साथ सिरहासार भवन तक लाया गया।यहां पहले से तैयार किए गए विशेष कुंड में पूजा-अर्चना और संकल्प के बाद जोगी को पालथी मारकर बैठाया गया और कुंड के चारों ओर पर्दे लगाए गए, ताकि वे एकांत में रहकर अपनी साधना कर सकें। इस तरह सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए 9 दिवसीय तपस्या का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस दौरान महापौर संजय पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधि मांझी,चालकी,पुजारी और टेम्पल कमेटी के लोग और अधिकारी मौजूद थे।

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