नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने और काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने वाला बिल मंजूर कर दिया है।
विधेयक के अनुसार, इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का एक नया ढांचा तैयार करना है। प्रस्तावित विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल श्रम करने के लिए तैयार हों, प्रत्येक वित्त वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा को नया रूप देने का फैसला कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने वाला बिल मंजूर किया गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देने के लिए किया जा रहा है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य काम की मांग कर सकते हैं। पंचायत स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। काम अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे तालाब बनाना, सड़क की मरम्मत, नाला खुदाई, बागवानी, मिट्टी कार्य और अन्य सामुदायिक काम। ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना रोजगार देने और आजीविका को सुरक्षित करने का बड़ा जरिया है।
रोजगार में मजबूती लाने की जरूरत
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्तावित विधेयक के उद्देश्य और कारणों के बयान में कहा है कि मनरेगा ने पिछले 20 वर्षों में ग्रामीण परिवारों को सुनिश्चित मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अब इसमें और मजबूती लाने की जरूरत महसूस की जा रही है। मंत्री के अनुसार, बीते वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव हुए हैं। व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार और सरकार की प्रमुख योजनाओं के संतृप्ति-आधारित क्रियान्वयन के चलते ग्रामीण परिदृश्य में बदलाव आया है, जिसके अनुरूप रोजगार से जुड़ा नया और सशक्त ढांचा आवश्यक हो गया है।
MGNREGA : योजना का नाम बदलने पर कांग्रेस हमलावर
संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान MGNREGA का नाम बदलने को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, मोदी सरकार नाम बदलने में “मास्टर” है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार धीरे-धीरे इस योजना को खत्म करने का सोच रही है। इसके साथ कांग्रेस ने यह भी और पूछा कि आखिर “महात्मा गांधी नाम में क्या गलत है” कि उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार योजनाओं और कानूनों का नाम बदलने में “मास्टर” है। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, उन लोगों ने निर्मल भारत अभियान का नाम बदलकर स्वच्छ भारत अभियान कर दिया, और ग्रामीण एलपीजी वितरण कार्यक्रम का नाम बदलकर उज्ज्वला कर दिया। वे री-पैकेजिंग और ब्रांडिंग में माहिर हैं।”
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार योजनाओं और कानूनों का नाम बदलने में “मास्टर” है। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, उन लोगों ने निर्मल भारत अभियान का नाम बदलकर स्वच्छ भारत अभियान कर दिया, और ग्रामीण एलपीजी वितरण कार्यक्रम का नाम बदलकर उज्ज्वला कर दिया। वे री-पैकेजिंग और ब्रांडिंग में माहिर हैं।”
उन्होंने कहा कि, “वे पंडित नेहरू से नफरत करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि वे महात्मा गांधी से भी नफरत करते हैं। आखिर महात्मा गांधी के नाम में क्या गलत है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर पूज्य बापू रोजगार गारंटी योजना क्यों किया जा रहा है?”
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को MGNREGA का नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने के बिल को मंजूरी दे दी है। उनके अनुसार, अब इस योजना का नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ रखा जाएगा, और इसके तहत काम के दिनों की संख्या मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।






