बिलाईगढ़। रिश्तों की मर्यादा और मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। बरमकेला विकासखंड के ग्राम खोरी निवासी एक वृद्ध दंपति, गोरखनाथ नायक और उनकी पत्नी पद्मा अपनों के साथ-साथ अब सरकारी सिस्टम की बेरुखी की मार झेल रहे हैं। बेटे की मारपीट से तंग आकर घर छोड़ने वाले इस बेबस दंपति को सारंगढ़ के आशा निकेतन वृद्धाश्रम से भी बाहर निकाल दिया गया है।
बेटे की नशाखोरी ने उजाड़ा घर
पीड़ित गोरखनाथ नायक ने बताया कि उनका बेटा नशाखोरी का आदी है। नशे की हालत में वह अपने वृद्ध माता-पिता के साथ अक्सर मारपीट और अभद्र व्यवहार करता था। अपने ही घर में असुरक्षित महसूस करने के कारण शारीरिक रूप से कमजोर इस वृद्ध दंपति को अपना घर छोड़ना पड़ा। इसी वर्ष 12 जनवरी को उन्हें सारंगढ़ के आशा निकेतन वृद्धाश्रम में शरण मिली थी।
संस्था पर गंभीर आरोप : धक्के मारकर बाहर निकाला
गोरखनाथ का आरोप है कि करीब दो महीने तक वहां रहने के बाद 14 मार्च को आश्रम के जिम्मेदार लोगों ने उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। बेबस दंपति जब अपनी गुहार लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें वापस आशा निकेतन भेजने के बजाय सियान सदन जाने की सलाह दी गई।
जंगल में छोड़ने की साजिश?
मामले में सबसे चौकाने वाला मोड़ तब आया जब वृद्ध महिला पद्मा ने बताया कि जब वे थाने में थे, तब एक अज्ञात व्यक्ति उन्हें घर छोड़ने के बहाने अपनी चार पहिया गाड़ी में बैठाकर ले गया, लेकिन उन्हें घर पहुंचाने के बजाय बरमकेला के जंगलों में लावारिस छोड़ कर भाग निकला। आखिर वह व्यक्ति कौन था और किसके इशारे पर वृद्धों को जंगल में छोड़ा गया, यह जांच का बड़ा विषय है।
कलेक्टर और कोतवाली में न्याय की गुहार
अपने साथ हुए इस अमानवीय कृत्य के खिलाफ गोरखनाथ ने 16 मार्च को सारंगढ़ कलेक्टर और सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। 17 मार्च को पुनः जनदर्शन में आवेदन देकर उन्होंने दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। पीड़ित का सवाल है कि एक सरकारी वृद्धाश्रम से बिना किसी ठोस कारण के वृद्धों को क्यों निकाला गया?, अधिकारियों ने इस पीड़ित दंपति की सुध समय पर क्यों नहीं ली? और जंगल में छोड़ने वाली घटना के पीछे किसका हाथ है?
मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में
फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है। समाज के सजग नागरिकों ने मांग की है कि आशा निकेतन के जिम्मेदार अधिकारियों और इस पूरी घटना के दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी अन्य बुजुर्ग को ऐसी प्रताड़ना न झेलनी पड़े।






