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नसबंदी कांड का 12 साल बाद आया फैसला : अदालत ने डॉ. गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे हृदयविदारक नसबंदी कांड में 12 साल के लंबे इंतजार बाद आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है। बिलासपुर की सत्र अदालत ने मुख्य आरोपी डॉ. आर.के. गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया है, जबकि मामले के 5 अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया है। यह फैसला न्यायालय प्रथम सत्र न्यायाधीश शैलेश केतारप की कोर्ट ने सुनाया।

सकरी के नसबंदी शिविर में 18 महिला-पुरुषों की मौत

विदित हो कि, 2014 में सकरी नेमिचन्द्र जैन अस्पताल में शिविर लगा था। शिविर में 85 महिलाओं और पुरुषों की नसबंदी हुई थी, जिसमें 13 महिलाओं और 5 पुरुषों की मौत हुई थी। नसबंदी कांड में हुए मौत का कारण ऑपरेशन में लापरवाही बताया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देशभर में हंगामा मच गया था। राहुल गांधी भी बिलासपुर मृतकों के परिजनों से मिलने आए थे। मामले की अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र राव सोमवार ने पुष्टी की।

तीन घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन किया था डॉक्टर ने

इसी तरह पेंडारी और पेंड्रा में सरकारी नसबंदी शिविर में 137 महिलाओं का ऑपरेशन हुआ। इसमें 13 महिलाओं सहित 18 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में तीन घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर आरके गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया था। नसबंदी के दौरान जिन महिलाओं की मौत हुई, उनके पोस्टमॉर्टम और कल्चर रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि संक्रमण की वजह से ये मौतें हुईं।

BABU RAO

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