नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए नए परिसीमन प्रस्ताव ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने और 2011 की जनगणना के आधार पर सीमाओं के पुनर्निर्धारण के बिल ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छेड़ दी है। गुरुवार को सदन में बिल पेश होते ही दक्षिण भारत के राज्यों से लेकर विपक्षी गलियारों तक विरोध की आग फैल गई है।
गुरुवार को लोकसभा में जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन से लेकर सड़क तक विरोध की आग फैल गई। जहां दक्षिण भारत के राज्यों ने इसे अपनी राजनीतिक शक्ति कम करने की साजिश बताया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार का गुप्त एजेंडा करार दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस बिल के विरोध में उग्र प्रदर्शन की कमान संभाली है, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है।
विधेयक की कॉपी जलाई और लहराया काला झंडा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान स्टालिन ने सार्वजनिक रूप से विधेयक की प्रति जलाई और काला झंडा लहराकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इस कदम को ‘फासीवादी’ बताते हुए चेतावनी दी कि तमिलनाडु इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा।
स्टालिन ने कहा – मैं इस बिल की प्रति जलाकर वह आग लगा रहा हूं
स्टालिन ने भावुक अपील करते हुए कहा, मैं इस बिल की प्रति जलाकर वह आग लगा रहा हूं, जो उन लोगों को जवाब देगी जो तमिलों को अपने ही देश में शरणार्थी बनाना चाहते हैं। डीएमके ने इसे दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
अखिलेश यादव बोले – यह खुफिया लोगों की गुप्त योजना है
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा में बिल पेश होने के दौरान सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूछा, सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है? आखिर वह क्या छिपाना चाहती है?
आरक्षण के लिए जल्दबाजी क्यों : अखिलेश
महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है हम, लेकिन जो जल्दबाजी है, जिस तरह से लाया जा रहा है, उसके खिलाफ हैं। जातीय जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा, यह सबसे बचना चाहते हैं। देश में आरक्षण के साथ-साथ संरक्षण की ज्यादा जरूरत है।
अखिलेश बोले – खुफिया लोगों की गुप्त योजना
अखिलेश ने इसे खुफिया लोगों की गुप्त योजना बताते हुए कहा कि सरकार महिला आरक्षण का नाम लेकर असल में परिसीमन के जरिए सत्ता पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने साफ किया कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से परिसीमन की आड़ में चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल की जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
संसद में हंगामा : आज पेश हुए वो 3 महत्वपूर्ण बिल
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान आज तीन प्रमुख विधेयकों ने सदन का तापमान बढ़ा दिया :
* संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 : लोकसभा की अधिकतम संख्या 850 करने का प्रावधान।
* परिसीमन विधेयक, 2026 : 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीमाएं तय करने का प्रस्ताव।
* केंद्र शासित प्रदेश विधेयक : दिल्ली और अन्य UTs में सीटों का समायोजन।
सरकार का तर्क है कि 1973 के बाद से सीटें नहीं बढ़ी हैं और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत के लिए यह जरूरी है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज कर ओबीसी और दलितों के हिस्से की ‘चोरी’ कर रही है।
दक्षिण बनाम उत्तर : जनसंख्या नियंत्रण की ‘सजा’ पर बवाल
दक्षिण भारतीय राज्यों का सबसे बड़ा विरोध इस बात पर है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को सफलतापूर्वक लागू किया, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों की आबादी बढ़ती रही।
पी. चिदंबरम और एम.के. स्टालिन का तर्क है कि परिसीमन के बाद यूपी और बिहार जैसे राज्यों की सीटें बढ़कर 140 तक पहुंच जाएंगी, जबकि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व आनुपातिक रूप से घट जाएगा। उनका कहना है कि अच्छे काम के लिए उन्हें सजा दी जा रही है और यह संघीय ढांचे पर बड़ा प्रहार है।
सरकार की सफाई और मायावती का समर्थन
भारी हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि विपक्ष परिसीमन के गलत आंकड़े पेश कर दक्षिण के राज्यों को बरगला रहा है। उन्होंने कहा कि जब सीटें 850 होंगी, तो आनुपातिक रूप से दक्षिण को भी फायदा होगा।
दिलचस्प बात यह है कि जहां अन्य विपक्षी दल विरोध में हैं, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण का स्वागत करते हुए इसे ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया है। हालांकि, उन्होंने भी एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।

















