नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए अधिकारियों के तबादलों को हरी झंडी दे दी है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुवेंदु अधिकारी के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में किए गए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग के पास ये अधिकार हैं। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में उठाए गए कानूनी सवालों को भविष्य के लिए खुला रखा गया है। इस फैसले से चुनाव आयोग की उन कार्रवाइयों को मजबूती मिली है, जिन्हें राज्य सरकार ‘हस्तक्षेप’ बता रही थी।
ममता बनर्जी का तीखा हमला: “दिल्ली के जमींदार”
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर सीधा हमला बोला। ममता बनर्जी ने कहा, “पश्चिम बंगाल के लोग दिल्ली के जमींदारों को मुंहतोड़ जवाब दें।” उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे लोग बंगाल की जनता के मतदान के अधिकार छीनने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
शुवेंदु अधिकारी का पलटवार : ‘सनातन विरासत’ बनाम ‘अरबी संस्कृति’
दूसरी ओर, भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया। शुवेंदु ने दावा किया कि राज्य में जानबूझकर ‘अरबी संस्कृति’ को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बंगाल की मूल ‘सनातन विरासत’ कमजोर हो रही है। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा बंगाल को ‘बंगाली हिंदुओं की मातृभूमि’ के रूप में सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

















