दिल्ली। ईरान जंग से रसोई गैस की किल्लत की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 60 रुपए बढ़ा दिया है। यह कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई है। राजधानी रायपुर में 14.2 किलो की LPG गैस अब 985 रुपए में मिलेगी। पहले यह कीमत 824 रुपए थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर पहले 1995 रुपए का था। अब यह 2109.50 रुपए में मिलेगा। अर्थात् 114.50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
विदित हो कि इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। अब यह बढ़ोतरी लगभग सालभर बाद हुई है। वहीं इस वर्ष 1 मार्च को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए बढ़ाए गए थे।
सरकार ने बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के बीच देश में गैस किल्लत की आशंका जताई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई ठप हो सकती है। इसी आशंका पर सरकार ने यह आदेश जारी किया है। सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था।
सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम शामिल हैं।
बंद हो सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यह जल मार्ग लगभग 167 किमी लंबा है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं है। इस कारण कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहे हैं।
बताया जाता है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है और ईरान इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
प्लांट पर ड्रोन हमला, LNG का प्रोडक्शन रुका
पिछले सप्ताह अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है।
क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955
सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 (ESMA) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके जारी किया है। इससे पहले सरकार ने यूक्रेन युद्ध के बाद तेल क्षेत्र में ESMA के नियमों को लागू किया था। तब रिफाइनिंग कंपनियों से कहा गया था कि वे देश में फ्यूल की कमी न होने दें और इसे बाहर एक्सपोर्ट न करें, क्योंकि उस समय भारी मार्जिन मिलने की वजह से तेल बाहर बेचना काफी फायदे का सौदा बन गया था।






